रागी की खेती: पोषण से भरपूर और कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली फसल

रागी की खेती: पोषण से भरपूर और कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली फसल
रागी, जिसे फिंगर मिलेट, मंडुआ और अफ्रीकन रागी के नाम से भी जाना जाता है, आज फिर से किसानों और उपभोक्ताओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। पहले इसे मुख्य रूप से पहाड़ी और शुष्क क्षेत्रों की फसल माना जाता था, लेकिन अब इसकी बढ़ती पोषण मांग और बेहतर बाजार मूल्य के कारण कई किसान इसकी व्यावसायिक खेती भी करने लगे हैं।

रागी में कैल्शियम, आयरन, फाइबर और प्रोटीन की मात्रा सामान्य अनाजों की तुलना में अधिक पाई जाती है। यही कारण है कि इसका उपयोग अब हेल्थ फूड, बेबी फूड, मल्टीग्रेन आटा और कई पोषण उत्पादों में बढ़ गया है। कम पानी में अच्छी पैदावार देने की क्षमता इसे सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए भी लाभकारी फसल बनाती है।

रागी की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी

रागी गर्म और मध्यम आर्द्र जलवायु में अच्छी बढ़वार करती है। यह फसल 20°C से 34°C तापमान के बीच बेहतर विकास करती है और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी सफलतापूर्वक उगाई जा सकती है। इसकी खास बात यह है कि यह सूखे की स्थिति को काफी हद तक सहन कर लेती है।

मिट्टी की बात करें तो अच्छी जल निकास वाली दोमट, हल्की काली और पहाड़ी मिट्टी इसके लिए उपयुक्त मानी जाती है। खेत में पानी जमा नहीं होना चाहिए क्योंकि अधिक जलभराव जड़ों के विकास को प्रभावित कर सकता है। मिट्टी का pH लगभग 4.5 से 8 के बीच उपयुक्त माना जाता है।

खेत की तैयारी कैसे करें

रागी की अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी सही तरीके से करना जरूरी होता है। सबसे पहले खेत की 2 से 3 बार गहरी जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए ताकि नमी संरक्षित रहे और जड़ों का विकास बेहतर हो सके।

अंतिम जुताई के समय खेत में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। कई किसान शुरुआती जड़ विकास को मजबूत करने के लिए जैविक उत्पादों और 4 kilogram Mycopep GR माइकोराइजा आधारित उत्पादों का भी उपयोग करते हैं।

बुवाई का सही समय और तरीका

अधिकांश क्षेत्रों में रागी की बुवाई खरीफ मौसम में जून से जुलाई के बीच की जाती है। कुछ किसान नर्सरी तैयार करके पौध रोपाई विधि भी अपनाते हैं जिससे पौधों की संख्या संतुलित रहती है और उत्पादन बेहतर मिलता है।

सीधी बुवाई के लिए कतार से कतार की दूरी लगभग 25 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर रखना उपयुक्त माना जाता है। बीजों की बुवाई 3 से 4 सेंटीमीटर गहराई पर करनी चाहिए।

बीज उपचार क्यों जरूरी है

रागी की फसल में शुरुआती रोगों और मिट्टी जनित संक्रमण से बचाव के लिए बीज उपचार बेहद जरूरी माना जाता है। बुवाई से पहले बीजों को CLAUN (Carbendazim 12% + Mancozeb 63% WP) जैसे फफूंदनाशकों से उपचारित किया जा सकता है।

खाद एवं पोषण प्रबंधन

रागी की फसल कम संसाधनों में भी अच्छी पैदावार दे सकती है, लेकिन संतुलित पोषण देने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर होते हैं।

बुवाई से पहले खेत में गोबर की खाद के साथ 4 kg/acre  Mycopep (Mycorrhiza GR) डालना लाभकारी माना जाता है। इसके अलावा नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित प्रयोग पौधों की वृद्धि और बालियों के विकास में मदद करता है।

सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी होने पर पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है, इसलिए समय समय पर खेत का निरीक्षण करना जरूरी होता है।

खरपतवार नियंत्रण का सही तरीका

फसल की शुरुआती अवस्था में खरपतवार तेजी से बढ़ते हैं और पौधों से पोषक तत्व व नमी छीन लेते हैं। इसलिए शुरुआती 30 से 40 दिन खरपतवार नियंत्रण के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। समय पर निराई गुड़ाई करने से पौधों की बढ़वार बेहतर होती है। कुछ किसान आवश्यकता अनुसार खरपतवारनाशकों का भी प्रयोग करते हैं ताकि खेत लंबे समय तक साफ रहे।

सिंचाई प्रबंधन

रागी सामान्यतः वर्षा आधारित फसल मानी जाती है, इसलिए इसे बहुत अधिक सिंचाई की जरूरत नहीं होती। हालांकि यदि लंबे समय तक वर्षा न हो तो फूल आने और दाना बनने की अवस्था में सिंचाई करना लाभकारी रहता है। खेत में उचित जल निकास बनाए रखना भी जरूरी होता है ताकि अतिरिक्त पानी पौधों को नुकसान न पहुंचाए।

प्रमुख कीट और रोग उनका नियंत्रण 

कीट / रोग  नुकसान  नियंत्रण 
सैनिक सुंडी शुरुआती अवस्था में पौधों को काटकर नुकसान पहुंचाती है Fifty-O-5 (Chlorpyriphos 50% + Cypermethrin 5% EC) 250ml/acre छिड़काव करें।
चेपा पत्तियों का रस चूसकर पौधों को कमजोर करता है PEPMIDA 30 (Imidacloprid 30.5% SC) 25-30ml/acre छिड़काव करें।
तना छेदक तनों और जड़ों को नुकसान पहुंचाता है PEPORA (Chlorantraniliprole 18.5% SC) 60ml/acre छिड़काव करें।
पत्ता लपेट सुंडी पत्तियों को मोड़कर अंदर से नुकसान पहुंचाती है BEHTAR (CHLORPYRIPHOS 20% EC) 500ml/acre छिड़काव करें।
येलो मोज़ेक वायरस पत्तियों पर पीले धब्बे बनने लगते हैं PEPMIDA-17 (Imidacloprid 17.8% SL) 40-50 ml/acre छिड़काव करें। संक्रमित पौधों को हटाकर नियंत्रण करें

कटाई और उत्पादन

रागी की फसल सामान्यतः 100 से 120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। जब बालियां पूरी तरह पक जाएं और दाने कठोर हो जाएं, तब कटाई करनी चाहिए।

कटाई के बाद बालियों को अच्छी तरह धूप में सुखाना जरूरी होता है ताकि भंडारण के समय नमी की समस्या न हो। सही प्रबंधन अपनाने वाले किसान अच्छी गुणवत्ता के साथ बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

निष्कर्ष

रागी की खेती कम लागत, कम पानी और बेहतर पोषण मूल्य के कारण किसानों के लिए तेजी से लाभकारी विकल्प बनती जा रही है। बदलते मौसम और पानी की कमी वाली परिस्थितियों में यह फसल स्थिर उत्पादन देने की क्षमता रखती है।

यदि किसान उन्नत किस्मों का चयन, संतुलित पोषण, समय पर खरपतवार नियंत्रण और उचित फसल सुरक्षा अपनाएं, तो रागी की खेती लंबे समय तक अच्छा आर्थिक लाभ देने वाली फसल साबित हो सकती है।