पोपलर एक तेजी से बढ़ने वाला पतझड़ी वृक्ष है, जो सैलिकेसी परिवार से संबंधित है। इसकी लकड़ी हल्की लेकिन मजबूत होती है, इसलिए इसका उपयोग प्लाईवुड, माचिस की तीलियां, बोर्ड, खेल सामग्री और पेंसिल बनाने में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
पोपलर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम समय में तेजी से बढ़ता है। सही जलवायु और उचित देखभाल मिलने पर यह 5 से 7 वर्षों में लगभग 85 फीट तक ऊंचाई प्राप्त कर सकता है। यही कारण है कि किसान इसे एक लाभदायक वृक्ष फसल के रूप में अपनाते हैं।
भारत में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में पोपलर की खेती बड़े स्तर पर की जाती है। इसकी खेती में शुरुआती वर्षों में अंतरवर्ती फसलें भी ली जा सकती हैं, जिससे किसान अतिरिक्त आय भी प्राप्त कर सकते हैं।
पोपलर की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी
पोपलर की अच्छी बढ़वार के लिए 20°C से 30°C तापमान उपयुक्त माना जाता है। इसकी खेती उन क्षेत्रों में अच्छी होती है जहाँ 750 से 800 मिमी तक वर्षा होती है। सामान्य जलवायु में भी यह अच्छी तरह बढ़ता है, लेकिन बहुत अधिक जलभराव इसकी बढ़वार को प्रभावित कर सकता है।
मिट्टी की बात करें तो पोपलर की खेती के लिए जैविक तत्वों से भरपूर उपजाऊ दोमट मिट्टी सबसे बेहतर रहती है। मिट्टी का pH 5.8 से 8.5 होना चाहिए। खारी और क्षारीय मिट्टी में इसकी खेती नहीं करनी चाहिए, क्योंकि ऐसी मिट्टी में पौधों की बढ़वार कमजोर रहती है।
खेत की तैयारी, रोपाई का समय और पौधों की दूरी
पोपलर की अच्छी बढ़वार के लिए रोपाई से पहले खेत की सही तैयारी करना बहुत जरूरी है। सबसे पहले खेत की 2 से 3 बार जुताई करें, ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए और पौधों की जड़ों का विकास अच्छी तरह हो सके। पौधों की रोपाई के लिए 1 मीटर गहरे गड्ढे तैयार करें। गड्ढों की सही तैयारी से पौधों की जड़ें मिट्टी में अच्छी तरह फैलती हैं और पौधों की शुरुआती बढ़वार मजबूत होती है।
पोपलर के नए पौधे लगाने के लिए जनवरी से फरवरी का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। सामान्यतः 15 फरवरी से 10 मार्च के बीच रोपाई करना अच्छा रहता है, क्योंकि इस समय मौसम पौधों की स्थापना के लिए अनुकूल होता है।
पौधों के बीच उचित दूरी रखना भी जरूरी है। यदि 5 x 5 मीटर की दूरी रखी जाए, तो लगभग 182 पौधे प्रति एकड़ लगाए जा सकते हैं। वहीं 5 x 4 मीटर की दूरी पर लगभग 396 पौधे प्रति एकड़ लगाए जा सकते हैं।
सही दूरी रखने से पौधों को पर्याप्त धूप, हवा और पोषण मिलता है, जिससे उनकी बढ़वार बेहतर होती है और भविष्य में लकड़ी की गुणवत्ता भी अच्छी मिलती है।
पौध रोपाई , बीज उपचार और खाद
पौधों को लगाने से पहले गड्ढों में 2 किलो गोबर की खाद, 50 ग्राम Myco-Pep (Mycorrhiza GR) और 50 ml KRISA (Potassium Solubilizing Bacteria) मिलाना चाहिए। इससे पौधों की शुरुआती बढ़वार अच्छी होती है।
नए पौधों को कीट और रोगों से बचाने के लिए रोपाई से पहले TRIOMETHOXAM 30 (Thiamethoxam 30% FS 180-200ML को 100 लीटर पानी में मिलाकर उपचार करें।
खरपतवार नियंत्रण और छंटाई
शुरुआती अवस्था में खरपतवार पौधों की बढ़वार को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए समय-समय पर खरपतवार हटाना जरूरी है।
जब पौधे 2 से 3 साल के हो जाएं, तो एक तिहाई शाखाओं की छंटाई करें।
4 से 5 वर्ष के पौधों में आधी शाखाओं की छंटाई करनी चाहिए।
छंटाई हमेशा सर्दियों में करें और कटे हुए भाग पर बोर्डो पेस्ट लगाएं ताकि संक्रमण न हो।
सिंचाई प्रबंधन
रोपाई के बाद तुरंत सिंचाई करें ताकि पौधे अच्छी तरह स्थापित हो सकें।
पहले वर्ष में मानसून आने तक हर 7 दिन में हल्की सिंचाई करनी चाहिए। सर्दियों में महीने में दो बार सिंचाई पर्याप्त रहती है।
दूसरे वर्ष में सर्दियों में 15-20 दिन के अंतराल पर और गर्मियों में 7 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें।
तीसरे वर्ष और उसके बाद गर्मियों में महीने में दो बार सिंचाई करनी चाहिए।
मुख्य कीट और उनका नियंत्रण
| कीट | नुकसान | नियंत्रण |
| दीमक | जड़ों और तनों को नुकसान पहुंचाती है | BEHTAR (CHLORPYRIPHOS 20% EC) 2.5 लीटर प्रति एकड़ डालें |
| तना छेदक | तने में छेद करके पौधे को कमजोर करता है | FY-GRO 3 (Fipronil 0.3 % GR) 6-8 किलो प्रति एकड़ डालें |
| पत्ती खाने वाले कीट | पत्तियां झड़ने लगती हैं | Fifty-O-5 (Chlorpyriphos 50% + Cypermethrin 5% EC) का छिड़काव करें |
मुख्य रोग और उनका नियंत्रण
| रोग | लक्षण | नियंत्रण |
| झुलस रोग | पत्ते झुलसने लगते हैं | TOSEM 70 (Thiophanate Methyl 70% WP) 286gm/एकड़ का प्रयोग करें। |
| सूखा रोग | पौधा सूखने लगता है | CLAUN (Carbendazim 12% + Mancozeb 63% WP) 700gm/acre का छिड़काव करें। |
कटाई और उत्पादन
पोपलर की फसल सही समय पर काटने से बेहतर बाजार मूल्य मिलता है।
यदि पौधे का घेरा 24 इंच और वजन 1 क्विंटल हो, तो बाजार में लगभग ₹900 प्रति क्विंटल मूल्य मिल सकता है।
यदि पौधे का घेरा 10 से 18 इंच और वजन 1.5 क्विंटल हो, तो लगभग ₹725 प्रति क्विंटल मूल्य मिल सकता है।
इसलिए बेहतर लाभ के लिए कटाई सही समय पर करनी चाहिए।
निष्कर्ष
पोपलर की खेती किसानों के लिए एक लाभदायक वृक्ष फसल है। यह कम समय में अच्छी बढ़वार देती है और इसकी लकड़ी की बाजार में अच्छी मांग रहती है। यदि सही किस्म, उचित दूरी, संतुलित खाद और समय पर कीट रोग नियंत्रण किया जाए, तो किसान पोपलर की खेती से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।