
प्याज की खेती (pyaz ki kheti) एक ऐसी सब्जी है जिसे हर खाने में इस्तेमाल किया जाता है। इसके बिना हर सब्जी अधूरी है। यह एक ऐसी सब्जी है जो स्वाद तो बढ़ाती ही है साथ-साथ किसानों के लिए आय का बहुत ही अच्छा स्त्रोत है। अगर प्याज की खेती अच्छे से की जाए तो बहुत ही तगड़ा मुनाफा लिया जा सकता है। इस ब्लॉक में हम बात करेंगे प्याज की खेती के बारे में, जहां भूमि तैयारी से लेकर रोग, कीट और खरपतवार नियंत्रण तक सब कुछ समझाया गया है।
प्याज की खेती (pyaz ki kheti) के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी
प्याज एक ऐसी फसल है जिसके लिए दिन का तापमान 20 से 30 डिग्री सेल्सियस का होना चाहिए और रात का तापमान 12 से 18 डिग्री सेल्सियस का उचित होता है। अगर बहुत ज्यादा ठंड या बहुत ज्यादा गर्मी पड़ रही है तो यह प्याज की खेती के लिए नुकसानदायक हो सकता है। अगर हम मिट्टी की बात करें तो प्याज की खेती के लिए दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी रहती है। इसमें मिट्टी का पीएच 6 से 7 के बीच होना चाहिए। हमें ध्यान रखना चाहिए की खेत की मिट्टी में जल निकासी का सही से प्रबंध किया गया हो। अगर खेत में जल भराव होता है तो प्याज की गांठे ठीक से विकसित नहीं होती।
भूमि की तैयारी और बीज बुवाई
अब जानते हैं की भूमि की तैयारी कैसे की जाए। तो सबसे पहले खेत को दो से तीन बार हल चलाकर भुरभुरा कर लें। अब खेत में 8 से 10 टन सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट डालें। प्याज की खेती के लिए 1 किलो बीज प्रति एकड़ काफी होता है। सबसे पहले प्याज की नर्सरी बनाकर पौध तैयार की जाती है। नर्सरी में बीज को एक सेंटीमीटर गहराई पर बोकर हलकी सिंचाई करनी चाहिए। जब पौध 45 से 50 दिन की हो जाती है तो वह रोपाई के लिए तैयार हो जाती है। रोपाई के समय ध्यान रखें की पंक्ति से पंक्ति की दूरी 15 सेंटीमीटर हो और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर हो।
खाद और सिंचाई प्रबंधन
प्याज को संतुलित पोषण की बहुत ज़रूरत होती है क्योंकि यह मिट्टी से कई पोषक तत्व खींच लेती है। फसल की अच्छी बढ़वार के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित प्रयोग जरूरी है।
| पोषक तत्व | मात्रा (किलो/एकड़) | प्रयोग का समय |
| नाइट्रोजन (N) | 60 | आधी रोपाई के समय, आधी 30 दिन बाद |
| फास्फोरस (P2O5) | 40 | भूमि तैयारी के समय |
| पोटाश (K2O) | 40 | भूमि तैयारी के समय |
इसके अलावा, सूक्ष्म तत्वों जैसे आयरन, बोरॉन और जिंक की कमी प्याज की गुणवत्ता को प्रभावित करती है। इनकी पूर्ति के लिए अमिनो एसिड, ह्यूमिक एसिड और सीवीड एक्सट्रैक्ट जैसे बायो स्टिमुलेंट्स का उपयोग करना चाहिए। ये जड़ों को मजबूत करते हैं, बल्ब का आकार बढ़ाते हैं और फसल को नुकसान से बचाते हैं।
सिंचाई प्रबंधन
प्याज की जड़ें उथली होती हैं इसलिए नियमित सिंचाई जरूरी है। रोपाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई करें। इसके बाद 8 से 10 दिन के अंतर पर सिंचाई करनी चाहिए। फसल पकने के समय पानी की मात्रा धीरे धीरे कम करनी चाहिए, वरना प्याज की गांठों पर फफूंद का असर हो सकता है।
खरपतवार नियंत्रण
प्याज की खेती में खरपतवार एक बड़ी चुनौती हैं क्योंकि वे फसल के पोषक तत्वों और नमी के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। खेत को साफ रखने के दो तरीके हैं:
- सांस्कृतिक नियंत्रण – हाथ से निराई करना या हेरो चलाना।
- रासायनिक नियंत्रण – रोपाई के तुरंत बाद BULDAN 30 (Pendimethalin 30% EC) जैसे प्री इमर्जेंस हर्बीसाइड का छिड़काव किया जा सकता है।
मात्रा: 1.0 से 1.2 लीटर प्रति एकड़
पानी की मात्रा: 200 लीटर प्रति एकड़
समय: रोपाई के 1–2 दिन के भीतर, जब मिट्टी में हल्की नमी हो।
इससे शुरुआती अवस्था में खरपतवार नहीं उगते और पौधों को बढ़ने का पर्याप्त समय मिलता है।
रोग प्रबंधन
प्याज की खेती (pyaz ki kheti) में कई तरह के रोग लगते हैं जो उपज को बहुत घटा सकते हैं। मुख्य रोग इस प्रकार हैं:
- पर्पल ब्लॉच (Purple blotch) – यह रोग Alternaria porri फफूंद के कारण होता है। पत्तियों पर बैंगनी या भूरे धब्बे बनते हैं। इसके नियंत्रण के TIRAAN-T (Azoxystrobin 11% + Tebuconazole 18.3 % SC) का छिड़काव करना चाहिए।
मात्रा: 300 मिली प्रति एकड़
पानी की मात्रा: 200 लीटर
समय: रोग दिखने पर या रोकथाम के लिए 10–12 दिन के अंतर पर दो स्प्रे करें। - डाउन माइल्ड्यू (Downy mildew) – यह रोग ठंडे और नम मौसम में फैलता है। पत्तियों पर हल्के पीले धब्बे बनते हैं जो बाद में ग्रे रंग के हो जाते हैं। रोकथाम के लिए BURZATE (Metalaxyl 8% + Mancozeb 64% WP) फफूंदनाशक का प्रयोग प्रभावी रहता है।
मात्रा: 800 ग्राम प्रति एकड़
पानी की मात्रा: 200 लीटर
समय: लक्षण दिखते ही छिड़काव करें और 10–15 दिन बाद दोहराएं। - स्टेमफिलियम ब्लाइट (Stemphylium blight) – यह रोग अधिक नमी में फैलता है। पत्तियाँ सूखने लगती हैं और फसल की बढ़वार रुक जाती है। इसके लिए TIRAAN-T (Azoxystrobin 11% + Tebuconazole 18.3 % SC) फफूंदनाशक उपयोगी हैं।
मात्रा: 300 मिली प्रति एकड़
पानी की मात्रा: 200 लीटर
समय: शुरुआती अवस्था में स्प्रे करें और जरूरत हो तो दोहराएं।
रोगों की रोकथाम के लिए खेत में उचित वायु संचार बनाए रखना, सिंचाई का सही प्रबंधन करना और फसल चक्र अपनाना भी बहुत जरूरी है।
कीट प्रबंधन
प्याज की खेती में सबसे अधिक नुकसान प्याज थ्रिप्स और प्याज की मक्खी से होता है।
- थ्रिप्स (Thrips tabaci) – यह छोटे सफेद कीट होते हैं जो पत्तियों का रस चूसते हैं, जिससे पत्तियां मुड़ जाती हैं और सफेद धारियां बन जाती हैं। इसके लिए PEPMIDA 30 (Imidacloprid 30.5% SC) का छिड़काव किया जा सकता है। साथ ही नीम तेल का प्रयोग जैविक विकल्प के रूप में किया जा सकता है।
मात्रा: 24-30 मिली प्रति एकड़
पानी की मात्रा: 200 लीटर
समय: कीट दिखने पर तुरंत छिड़काव करें, जरूरत होने पर 10 दिन बाद दोहराएं।
जैविक विकल्प: नीम तेल 1500 ppm – 2 मिली प्रति लीटर पानी। - प्याज मक्खी (Onion fly) – यह मक्खी प्याज की जड़ों में अंडे देती है। लार्वा जड़ों को खा जाते हैं जिससे पौधे मुरझा जाते हैं। इसके नियंत्रण के लिए PEPORA GR (Chlorantraniliprole 0.4% GR) दवा उपयोगी रहती है।
मात्रा: 4 से 5 किलो प्रति एकड़
विधि: रोपाई के बाद पौधों की जड़ों के आसपास हल्की मिट्टी के साथ मिलाकर डालें और सिंचाई करें। - कटवर्म (Cutworm) – यह कीट पौधों की जड़ को काट देता है जिससे पौधे गिर जाते हैं। इसके लिए BAREEK (Beauveria bassiana 1.15% WP) जैविक नियंत्रण का अच्छा उपाय है।
मात्रा: 2 किलो प्रति एकड़ 150 लीटर पानी में
विधि: मिट्टी में पानी के साथ ड्रेंचिंग करें या शाम के समय फोलियर स्प्रे के रूप में उपयोग करें।
समय: फसल की शुरुआती अवस्था में, जब पौधे छोटे हों।
बायो स्टिमुलेंट्स का उपयोग
फसल को तनावमुक्त रखने और उपज बढ़ाने के लिए बायो स्टिमुलेंट्स बहुत काम आते हैं। प्याज की खेती में निम्न बायो स्टिमुलेंट्स का उपयोग किया जा सकता है:
- Sonja Gold (Seaweed Extract Liquid 30%): जड़ विकास और बल्ब आकार में वृद्धि करता है।
मात्रा: 500 मिली प्रति एकड़
विधि: भूमि तैयारी के समय मिट्टी में डालें। - Aminofert Gold: पौधे को पोषण देता है।
मात्रा: 200-400 मिली प्रति एकड़ (फोलियर स्प्रे)
समय: फसल की वृद्धि अवस्था और बल्ब बनने की अवस्था में 2 से 3 बार छिड़काव करें। - Eco-Black (Potassium Humate Liquid 20%): मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है और पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करता है।
मात्रा: 1.5-2 मिली प्रति लीटर पानी प्रति एकड़ ड्रिप या फोलियर स्प्रे से।
समय: 25 से 30 दिन के अंतर पर दो बार।
इनका प्रयोग स्प्रे या ड्रिप के माध्यम से किया जा सकता है।
फसल की कटाई और भंडारण
प्याज की फसल लगभग 110 से 130 दिन में तैयार हो जाती है। जब पत्तियां सूखने लगें और गर्दन झुक जाए तब कटाई करनी चाहिए। कटाई के बाद प्याज को छाया में सुखाना जरूरी है ताकि इसका भंडारण समय बढ़ सके। प्याज को सूखी और हवादार जगह में रखना चाहिए ताकि सड़न न लगे।
निष्कर्ष
प्याज की खेती अगर वैज्ञानिक तरीके से की जाए तो यह बहुत लाभदायक फसल है। सही भूमि चयन, संतुलित पोषण, रोग और कीट प्रबंधन, साथ ही बायो स्टिमुलेंट्स का प्रयोग, फसल की उत्पादकता को काफी बढ़ा सकता है। छोटे बदलाव जैसे समय पर सिंचाई और साफ खेत रखने से भी बड़ा फर्क पड़ता है। सही योजना के साथ प्याज की खेती किसान के लिए हर सीजन में अच्छी आमदनी का जरिया बन सकती है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
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प्याज की खेती के लिए सबसे अच्छा मौसम कौन सा होता है?
प्याज की खेती के लिए ठंडा और सूखा मौसम सबसे अच्छा रहता है। रबी सीजन में यानी नवंबर से दिसंबर के बीच रोपाई और अप्रैल से मई के बीच कटाई करने पर बेहतर उपज मिलती है। बहुत ठंड या बहुत गर्म मौसम प्याज के विकास को प्रभावित करता है।
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प्याज की खेती के लिए कौन सी मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है?
दोमट या बलुई दोमट मिट्टी प्याज के लिए आदर्श होती है। इसमें जल निकासी सही होनी चाहिए और pH 6 से 7 के बीच होना चाहिए। पानी का रुकना प्याज की गांठों को सड़ाता है, इसलिए खेत समतल और सूखा रहना जरूरी है।
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प्याज की नर्सरी कैसे तैयार करें और रोपाई कब करें?
1 किलो बीज प्रति एकड़ पर्याप्त होता है। बीज को एक सेंटीमीटर गहराई पर बोकर हल्की सिंचाई करें। जब पौधे 45 से 50 दिन के हो जाएं, तब रोपाई करें। पंक्ति से पंक्ति की दूरी 15 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर रखें ताकि हवा और रोशनी का सही आवागमन हो।
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प्याज की सिंचाई कितनी बार करनी चाहिए?
रोपाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई करें। इसके बाद हर 8 से 10 दिन में पानी दें। जब फसल पकने लगे तो पानी धीरे धीरे कम करें ताकि प्याज की गांठों पर फफूंद न लगे।
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प्याज थ्रिप्स से कैसे बचें?
थ्रिप्स पत्तियों का रस चूसते हैं जिससे पत्तियां मुड़ जाती हैं।
रासायनिक नियंत्रण: PEPMIDA 30 (Imidacloprid 30.5% SC), 24 से 30 मिली प्रति एकड़, 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़कें।
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प्याज मक्खी के लिए क्या नियंत्रण उपाय हैं?
मक्खी जड़ों में अंडे देती है और लार्वा उन्हें खा जाते हैं जिससे पौधे मुरझा जाते हैं।
नियंत्रण: PEPORA GR (Chlorantraniliprole 0.4% GR), 4 से 5 किलो प्रति एकड़।
रोपाई के बाद पौधों की जड़ों के आसपास हल्की मिट्टी में मिलाएं और सिंचाई करें।
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प्याज की फसल कब तैयार होती है और कैसे काटें?
फसल लगभग 110 से 130 दिन में तैयार होती है। जब पत्तियां सूख जाएं और गर्दन झुक जाए, तब कटाई करें।
कटाई के बाद प्याज को छाया में सुखाकर सूखी और हवादार जगह में रखें ताकि भंडारण अवधि बढ़ सके।
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प्याज की खेती से औसतन कितनी उपज मिलती है?
अगर प्याज की खेती वैज्ञानिक तरीके से की जाए, तो एक हेक्टेयर में औसतन 250 से 300 क्विंटल प्याज प्राप्त किया जा सकता है।