इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट (IPM): फसल बचाने का आधुनकि तरीका

आज खेती करना पहले जैसा बिलकुल भी आसान नहीं रहा। मौसम कभी भी बदल जाता है और कीट हर साल नए तरीके से नुकसान करने लगते हैं। पहले एक बार दवा डालने से कीट खत्म हो जाते थे, लेकिन अब तो दवा बार-बार डालने पर भी पूरा असर नहीं दिखाती। इससे खर्च भी बढ़ता है और फसल पर दबाव भी पड़ता है।

इस परेशानी का एक समझदारी भरा हल है इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट, जिसे हम आसान भाषा में IPM कहते हैं। IPM का मतलब यह नहीं कि दवा बिल्कुल बंद कर दो। इसका मतलब है फसल को देखकर फैसला लेना जिससे फसल को कोई नुकसान न हो।

IPM क्या सिखाता है?

IPM हमें यह समझाता है कि हर कीट नुकसानदायक नहीं होता। खेत में कुछ कीट हमेशा रहते हैं, लेकिन जब तक कीटों की संख्या कम होती है, तब तक वे फसल को बड़ा नुकसान नहीं पहुंचाते। परेशानी तब शुरू होती है जब कीट तेजी से बढ़ने लगते हैं।

इसलिए IPM में पहले खेत को देखा जाता है। अगर कीट कम हैं, तो तुरंत दवा डालने की जरूरत नहीं होती। ऐसे समय में जैविक और हल्के उपाय काफी रहते हैं। दवा तभी डाली जाती है जब नुकसान बढ़ने लगे।

जैविक उपाय क्यों जरूरी हैं

IPM की सबसे मजबूत नींव जैविक उपचार होते हैं। इनमें ऐसे प्राकृतिक उत्पाद आते हैं जो कीटों को धीरे-धीरे कमजोर करते हैं, लेकिन फसल और मिट्टी को नुकसान नहीं पहुंचाते।

Beauveria bassiana और Metarhizium anisopliae जैसे जैविक उत्पाद कीट के शरीर में जाकर उसे खत्म करते हैं। नीम से बने उत्पाद कीटों की बढ़वार रोकते हैं। इनका सबसे बड़ा फायदा यह है कि कीट जल्दी हमला नहीं करते और खेत की सेहत बनी रहती है।

रासायनिक दवा कब और कैसे डालें

कई बार हालात ऐसे हो जाते हैं जब दवा डालना जरूरी होता है। IPM यह नहीं कहता कि दवा मत डालो, बल्कि यह कहता है कि दवा सोच-समझकर डालो।

दवा सही कीट के लिए हो, मात्रा उतनी ही हो जितनी बताई गई हो, और हर बार वही दवा दोहराई न जाए। ऐसा करने से दवा असर भी करती है और आगे चलकर कीट और ज्यादा मजबूत भी नहीं बनते।

खेत देखना सबसे जरूरी काम

IPM तभी काम करता है जब किसान खेत पर नजर रखे। पत्तियों को देखना, कीट और फसल की हालत समझना बहुत जरूरी है। इससे किसान सही समय पर सही फैसला ले पाता है।

जब खेत की निगरानी सही होती है, तो बेवजह का छिड़काव रुकता है और पैसा भी बचता है।

IPM अपनाने के फायदे

IPM अपनाने से धीरे-धीरे दवाओं पर होने वाला खर्च कम होने लगता है। फसल स्वस्थ रहती है और उसकी गुणवत्ता भी बेहतर होती है। सबसे अच्छी बात यह है कि मिट्टी खराब नहीं होती और अगली फसल भी अच्छी होती है।

निष्कर्ष

IPM कोई मुश्किल तरीका नहीं है। यह खेती को समझदारी से करने का तरीका है। जब किसान फसल देखकर फैसला लेता है और जैविक व रासायनिक उपायों का संतुलन रखता है, तब खेती लंबे समय तक फायदा देती है। आज के समय में IPM अपनाना हर किसान के लिए जरूरी बन चुका है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 

  1. क्या IPM सिर्फ जैविक खेती के लिए है?
    नहीं, IPM हर तरह की खेती में अपनाया जा सकता है।

  2. क्या IPM में दवा डालनी ही नहीं पड़ती?
    दवा डालनी पड़ती है, लेकिन तभी जब बहुत जरूरी हो।

  3. IPM अपनाने से खर्च कम होगा या बढ़ेगा?
    लंबे समय में खर्च कम होता है।

  4. क्या IPM से कीट पूरी तरह खत्म हो जाते हैं?
    नहीं, IPM कीटों को काबू में रखने का तरीका है।

  5. छोटे किसान भी IPM अपना सकते हैं?
    हां, छोटे किसानों के लिए IPM ज्यादा फायदेमंद है।

  6. IPM कब से शुरू करना चाहिए?
    बीज चयन और खेत की तैयारी से ही IPM शुरू हो जाता है।